Saturday, 24 January 2015
Thursday, 25 December 2014
हिमनद
जमी हुई थी
हिमनद सीने में
बर्फ़ ही बर्फ़
न कोई सरगोशी .. न हलचल
सब कुछ शांत, स्थिर, अविचल
फिर आए तुम
स्पर्श कर मन को
अपने प्रेम की ऊष्मा
मेरे ह्रदय में व्याप्त कर गए
बूँद बूँद पिघल उठी मैं
बह निकली
नदी सी मैं
बर्फ से गंगा बनी मैं
Thursday, 11 December 2014
रिक्तता
अजीब विरोधाभास है
~~~~~~~~~~~~~
रिक्तता का अहसास
कितना भारी कर देता है मन
कभी मन के
किसी कोने में
किसी की आहट सुनने को
कुछ सुगबुगाहट सुनने को
भटकते, टकराते फिरते
अपने ही मन की दीवारों से
पर भरी होती है वहां
हर ओर सिर्फ
रिक्तता
~~~~~~
है न
अदाकारा
अदाकारा
होती है छिपी
हर औरत के मन की तहों में,
गाहे-बेगाहे उभर आती है
कभी भी सामने दुनिया के
जब अंतर्मन की पीड़ा को पी कर
मुस्कुराती है
उसकी खुशहाली पर माँ उसकी
वारी-वारी जाती है
दर्द, अपमान, पीड़ा, अवहेलना की
बारीक लकीरों को
कितनी खूबसूरती से वह
व्यस्तता के अभिनय से छिपाती है.
आँखों में औचक भर आये आंसुओं को
आँख में कुछ गिर जाने के बहाने से ,
रुंधे हुए गले की बैठी हुई आवाज़
खांसी के पीछे छिपाने में
रात तकरार के बाद
गाल पर छपे उँगलियों के निशान
मेकअप के नीचे छिपाती
वो हँसतीहै, खिलखिलाती है
चाहे जितने भी निभाए रिश्ते
पर सब पर हावी रहती है
वो छिपी हुई
अदाकारा
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shalini rastogi
ज़रूरी नहीं
हर बार ज़रूरी नहीं होता
वज़ह पूछी जाए
कभी कयास लगाना ही बेहतर होता है
कि
बात करते करते अचानक
कोई चुप हो गया था क्यों
साथ चलते कदम अचानक
ठिठक के रुक गए थे क्यों
क्या सोचा होगा उसने
जो आँख यूँ भर आई होगी
एक नामालूम सी मुस्कराहट के पीछे
याद किसकी छिपाई होगी
क्या हुआ कि रस्ते बदल गए होंगे
कब, कैसे, कहाँ तार रिश्तों के
नए जुड़ गए होंगे
वज़ह पूछोगे तो
बेवज़ह बात बढ़ जाएगी
राख के ढेर में छिपी चिंगारी
कुरेदने से भड़क जायेगी
वज़ह के पीछे छिपा जवाब
तुम्हारे ख्यालों से मेल खाए
क्या पता वो तसव्वुर को
चकनाचूर कर जाए
तो अपने ख़्वाबों,ख्यालों,तसव्वुर को
सहलाते रहिए
वज़ह पूछने से बेहतर है ...कयास लगाते रहिए
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shalini rastogi
Sunday, 21 September 2014
रिश्ते ( श्रंखला -2 )
रिश्ते
जो पकते नहीं
समय के आंवे पर
नहीं उठती उनकी महक
रह जाते हैं कच्चे
हाँ! नहीं सहार पाते वे
निभाव का जल
संग-संग 'सोहणी' के
हो जाते हैं गर्क
अतल गहराइयों में
और रह जाते हैं उन
के
कुछ बुदबुदाते किस्से
हाँ , अधकचरे ही रह जाते है
कुछ रिश्ते !
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