Showing posts with label #ग़ज़ल #गुमशुदा #गुरूर #गुज़ारिश. Show all posts
Showing posts with label #ग़ज़ल #गुमशुदा #गुरूर #गुज़ारिश. Show all posts

Thursday, 19 February 2026

गुमशुदा

 गुमशुदा से हो गए वो, शहर छोड़े बैठे हैं

हम तो उनकी चौखट से, आस जोड़े बैठे हैं.

है गुरूर या गैरत , गैरियत है या गफलत,
अपनी है गरज फिर भी,मुँह को मोड़े बैठे हैं

अर्ज़ पर, गुज़ारिश पर भी ,खफ़ा से रहते हैं,
क्या गुमान है इतना, दिल जो तोड़े बैठे हैं .

काश अब निकल जाए, सब गुबार ये दिल का,
कितने तूफान आँखों में, दिल निचोड़े बैठे है

अब उन्हें बुलाने को कोई गुमाश्ता भेजें,
कासिदों की तो हिम्मत वो, कबकी तोड़े बैठे हैं,
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
Blogger Tips And Tricks|Latest Tips For Bloggers Free Backlinks