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Monday, 23 March 2026

होश या ख़ुमारी

 

होश है या कोई ख़ुमारी है?

है सुकूँ या कि बेक़रारी है?

 

तेरा होना अजाब था दिल पे,

तू नहीं तब भी दिल ये भारी है|

 

रतजगे बन गए नसीब उनका,

वस्ल में शब जो इक गुजारी है|

 

ज़ख्म अपना हरेक गिनते हो,

जो दिए उनकी कब शुमारी है?

 

तंज, ताने शिकायतें शिकवे,

इश्क है याकि जाँख़ुआरी है|

 

आँख से बूँद पैमाने में गिरी,

सारी मय अब तो खारी-खारी है|

 

हर दगा दोस्तों से पाई है,

देख लो कितनी पक्की यारी है|

 

तल्ख़ लहज़ा हमें भी आता है,

बस जुबां पे लिहाज़ तारी है|

 

अपना सामान ध्यान से रखना,

सूचना जन के हित में जारी है |

 

 

 

 

 

 

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