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Thursday, 19 February 2026

आरक्षण

 

आरक्षण

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छोटे-बड़े पक्षी’

सब भर रहे थे,

अपनी-अपनी उड़ानें |

अपने पंखों की हैसियत से,

दे रहे थे चुनौती गगन को,

बना रहे थे अपनी पहचानें|

तभी कुछ सियारों ने उन्हें आवाज़ लगाई,

पूरी तल्लीनता से परवाज़ भरने की कोशिश में लगे

कुछ छोटे कमज़ोर पक्षियों को बात समझाई |

देखो!

यह आकाश ... है भेदभाव से भरा

बड़े पक्षियों ने जमाया है ... अधिकार यहाँ ,

सदियों से आसमां पर राज करते ये बड़े पंछी,

नहीं भरने देंगे तुम्हें उड़ानें,

हर तरफ अपना हक़ जमाए बैठे ये सयाने|

पर अब तुम्हें डरने की नहीं ज़रूरत,

मत घबराओ देख अपनी कमज़ोर हैसियत|

कमज़ोर-छोटे पंख तुम्हारे,

क्यों उठाएँ भला उड़ने की ज़हमत?

सदियों से इन बड़े पक्षियों ने जो

किए हैं तुम पर अत्याचार,

आसमान में तुम्हारे आगे खड़ी की जो दीवार,

उसे तुम्हारे आगे से हम हटाएँगे,

इनके द्वारा किए गए भेदभाव से,

मुक्ति हम दिलाएँगे|

इस वर्ण-व्यवस्था के खिलाफ़,

हम तुम्हें देंगे ‘संरक्षण’,

इस आसमान में उड़ने को,

तुम्हें अब मिलेगा ‘आरक्षण’ |

न – न ,

तुम्हें अपने पंखों को कोई तकलीफ़ नहीं पहुँचाना है,

बस....  अब से छाती पीट चिल्लाना है –

इन ऊँचे उड़ने वालों ने हमें

सदियों से सताया है,

हमारे पंखों पर पहरा लगाया है|

तुम्हारा रोने को हम ऐसी चीख बनाएँगे |

इन ऊँची उड़ान भरने वालों के पंख कटवाएँगे|

अब ये बाज , तुमसे ऊँची परवाज़ नहीं भर पाएगा|

तुम्हारी छोटी उड़ान के नीचे उड़ना ही

इसकी नियति बन जाएगा|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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