Friday, 29 March 2019

राब्ता

राब्ता हुआ
दो रूहों के दरम्यां
और दो रूहें मिलकर
एक सिम्त हो गईं
फिर ज़िस्म ने सेंध लगाई
रूहों के दरम्यां
दो ज़िस्म मिले पर
रूहें जुदा हो गईं...
अब शिकायतें करती हैं रूहें
एक दूसरे से
कि हममें-तुममें नहीं रहा
वो पहले-सा
राब्ता
शालिनी रस्तौगी 

ख्वाहिशें


कभी इच्छाओं पर
कभी ख्वाहिशों पर
कभी आँखों, कभी कानों, कभी जुबाँ पर
वो एक – एक कर ताले जड़ती गई
चाभियों को संभाला तो था ....
कि कभो वक्त मिलेगा
कभी तो वह मौका आएगा ..
फिर खोल लेगी वह
इन तालों को
आज़ाद कर लेगी ख़ुद को
अपनी ही कैद से
पर .. अब जब वक़्त मिला है तो
उन जाम हुए तालों
और जंग खाई चाभियों के गुच्छे लिए
ढूँढती वह
किस ख्वाहिश पे लगे ताले को
खोले किस चाभी से ...
एक बार फिर क़ैद रह गईं
उसकी जुबाँ .... उसकी इच्छाएँ
उसकी ख्वाहिशें ...
  शालिनी रस्तौगी

Wednesday, 26 September 2018

राधिके मंथर मंथर आई



मत्तगयन्द सवैया 
पुष्प बिछा मग, मंजुल मंडप, माधव मोहक सेज सजाई|
वृक्ष, लता, तरु, पल्लव, कुञ्ज घने घिर ओट बना छातराई|
नृत्य मयूर कियो पिक गीत सुनकर की उनकी अगुआई|
बाँह पसारे खड़े बनमालि कि राधिके मंथर मंथर आई|
शालिनी रस्तौगी

मावस रात भई उजियारी


मत्तगयन्द सवैया 
सोवत ही सबके उठके चल दीं, धरती पग दाब धरा री|
नैन कहीं पर,ध्यान कहीं, उलझे पग, कैसन छाई खुमारी|
आँचल से मुख ढाँप चलीं, पहचान न जाय कोई खटका री|
पूनम चाँद चले  घुँघटा धर, मावस रात भई उजियारी |
शालिनी रस्तौगी 

Tuesday, 25 September 2018

रिझाय मुरारी



मत्तगयन्द सवैया
पाँव बढ़ाए, जरा सकुचाय, चली मिलने वृषभानुकुमारी |
चौंक घुमाय चहूँ दिशि चक्षु, हिय धड़के हर साँस हजारी|
लाज रही पग रोक खिंचा मन, है दुविधा कित जाय बिचारी|
कौन रहे बस, बाँसुरिया जब, राग बजाय रिझाय मुरारी |
शालिनी रस्तौगी 

बिछुआ छनके



पाँव बढ़े बिछुआ छनके छन, झाँझरिया उत शोर मचावे|
कंगन-चूरि करें चुगली, नथ झूमि हिले सब राज बतावे|
सास खड़ी अंगना, ननदी पहरा, उत मोहन टेर लगावे|
सोच-विचारि पड़ी अब क्या, मिलने की उनसे विधि-युक्ति लडावे|
शालिनी रस्तौगी 

Friday, 21 September 2018

पौधा क्यों कुम्हलाया


पौधा क्यों कुम्हलाया

सभी अपनी निगाहों में प्रश्नों के बाण लिए अपनी निगाहों से माली को भेद रहे थे और माली सिमटा हुआ-सा इस सोच में पड़ा था कि आखिर उससे कहाँ गलती हो गई? जैसे-जैसे इन सबने कहा था बिलकुल वैसे ही तो देखभाल की थी पौधे की .. फिर?? वह शुरू से सब बातों को क्रमबार सोचने लगा ...
जिसने पौधा रोपा था उससे पौधे की देखभाल करनी आती नहीं थी अतः उसने वह पौधा , पौधों की देखभाल करने वाली संस्था को दे दिया| माली को जब वह पौधा मिला तो उसने पौधे को अपना समझ कर अपनी पूरी काबिलियत से उसकी देखभाल शुरू कर दी क्योंकि वह जानता था कि पौधे को परवान कैसे चढ़ाया जाता है| एक दिन जब माली ने देखा कि पौधे कि एक पत्ती पीली पड़ रही है तो उसने उस पत्ते को तोड़ दिया| हेड माली ने माली को पौधे की पत्ती तोड़ते देख लिया| वह जोर से चिल्लाया, “तुमने किस हक से पौधे की पत्ती उखाड़ी ? तुम्हें पता है कि पौधे का मालिक कितना नाराज़ होगा?” “पर पीली पत्तियों को तोड़ना ज़रूरी होता है नहीं तो पौधे की बढ़त रुक जाती है” – माली ने तर्क दिया| बात संस्था प्रमुख के पास पहुंची तो उन्होंने माली को डाँटते हुए कहा – “तुम्हें ज्यादा दिमाग लगाने की कोई ज़रूरत नहीं है, अब हम बताएँगे कि पौधे की देखभाल कैसे करनी है|”
अब माली पर कड़ी निगाह रखी जाने लगी – “आज तुमने पौधे में कम पानी क्यों डाला, आज तुमने उसे धूप में क्यों रखा .... खाद थोड़ी ज्यादा डालो ... और हाँ, पौधे कि पत्ती तोड़ना तो दूर, उसे झूने की भी कोशिश मत करना|” माली पर .. पर कर्ता रह गया मगर फरमान सुनाने वाले सुना कर चले गए|
अब पौधे का मालिक जब पौधे के निरीक्षण के लिए आया तो देखा कि पौधे की पत्तियाँ पीली हो रही हैं| आगबबूला होते हुए उसने माली, हेड माली, संस्था प्रमुख सबको एक पंक्ति में खड़ा करके अल्टीमेटम दे दिया – “मैं तुम्हें पौधे की देखभाल करने के पैसे दे रहा हूँ और तुमने मेरे पौधे की पत्तियाँ पीली कर दीं,.... तुम्हारा माली किसी काम का नहीं है, मैं वन-विभाग में तुम्हारी शिकायत करूँगा .... कानूनी कार्यवाही करूँगा|”
पोधे के मालिक की चीख पर वन विभाग, पौधा संरक्षण संस्थाएँ, पुलिस, कानून सब डंडा लेकर संस्था के पीछे पड़ गए| संस्था प्रमुख ने हाथ जोड़ घिघियाते हुए कहा – “आप चिंता न करें. आपके इस पौधे को हरा-भरा करने में हम जी-जान लगा देंगे| इसके लिए हमने विदेशों से एक्सपर्ट बुलाए हैं, वे हमें सुझाव देंगे कि हमें पौडे की देखभाल कैसे करनी है|”
भारी-भरकम डिग्रियाँ लिए, आँखों पर विदेशी चश्मा चढ़ाए एक्सपर्ट ने दूर से पौधे की बारीकी से जाँच की  और कहा – “पौधे की देखभाल में प्यार की कमी है| आप अपने माली से कहिये कि वह प्रतिदिन पौधे को गाना सुनाए, उससे दिन में चार बार यह कहे कि तुम बहुत बहुत अच्छे हो, तुम बहुत बड़े पेड़ बनोगे .... पौधे को धूप में बिलकुल न निकला जाए और उसमें हर दिन यह विदेशी खाद डाली जाए|”
“पर यह तरीका यहाँ के मौसम और पर्यावरण के अनुकूल नहीं है .. और इस विदेशी खाद से पौधे की जड़ें ही गल जाएँगी .. जड़ें गल गईं तो फिर कैसे पनपेगा ” – माली बुदबुदाया| “चुप !!! तुम्हें क्या पता पौधे की देखभाल कैसे की जाती है| जैसा कहा जा रहा है वैसा करो” – चारों और से समवेत स्वर में आदेश आया| संस्था प्रमुख ने कहा – “वह पौधे की हर घंटे की प्रोग्रेस को लिखकर और ग्राफ बनाकर ऑफिस में सबमिट करे| हेड माली रोज़ तुम्हारी रिपोर्ट पौधे से लेगा कि कहीं तुम उसे कोई कष्ट तो नहीं पहुँचा रहे|”
अब माली प्रतिदिन उस पौधे को ए.सी. कमरे में गाना सुनाता है, दिन में चार बार उससे कहता है कि वह बहुत अच्छा है, ढेर सारा पानी और विदेशी खाद डालता है और हर घंटे उसकी लम्बाई चौड़ाई को नापकर रिपोर्ट तैयार करता है| परन्तु पौधा है कि दिन ब दिन कुम्हलाता ही जा रहा है|
क्या आप में से कोई बता सकता है कि पौधा क्यों कुम्हला रहा है??
शालिनी रस्तौगी

Thursday, 20 September 2018

माधव रूप धरा राधा


मत्तगयन्द सवैया 
रूप गहा जब माधव का पट पीत धरा नागरि राधा|
वेणु गही कर, श्याम छवी धर मोहक पाश बिछा बाँधा|
श्याम सलौनि छवी निरखी जब पूनम चाँद लगे अब आधा|
मोहन प्यारि, कृपा जिन पाकर, कौन सा काज नहीं कब साधा||
शालिनी रस्तौगी

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