क्या ठहरे जल के भीतर
लहरें उत्ताल तड़पती हैं ?
क्या शांत मन से कभी
कविता कोई जन्मती है?
न हो जब तक,
मन विह्वल, ह्रदय व्याकुल
भावों का अतिरेक न जब तक
प्राणों को कर डाले बोझिल |
हृदय के उदगार न जब तक
शब्दों में ढल जाने को मचलें|
आँखों की पीड़ा, आँसू में घुल
जब तक कागज़ पर न उतरे|
प्रसव वेदना बिना क्या जननी
बालक को जन पाती है?
जब ह्रदय कसकता दारुण दुःख से
तब कविता रच पाती है|
