Saturday, 13 April 2013
Friday, 12 April 2013
Thursday, 11 April 2013
Sunday, 7 April 2013
तो क्या ...........
पैरहन हो बादशाही, चेहरा नूरानी तो क्या ,
रूह में वहशत हो अगर, फिर ज़िस्म इंसानी तो क्या .
बेरुखी का क्यों दिखावा, क्यों जुबां पे तल्ख़ नश्तर,
है जिगर में इश्क तेरे , त्योरियाँ पेशानी तो क्या .
राज़ खोले आँख क्यों ये, दर्द सीने में भले हो
हो लबों पे मुस्कराहट, आँख में हो पानी तो क्या .
हाथ में तस्बीह लेकर, लूटते हो चैन सबका,
ख्वाब में दौलत जहाँ की, बात गर रूहानी तो क्या.
मंजिलें भी ढूँढ लेती, हैं पता उस शख्स का खुद,
पैर रख तो हौंसले से, राह हो अंजानी तो क्या .
है जुदा अंदाज़ तेरा, हैं निराले तेरे
हर तरफ़ है बात तेरी, है हमें हैरानी तो क्या .
Tuesday, 2 April 2013
इक आह ...
मुद्दतों, कौन सी शै थी जो , मचलती-सी रही.
तेरे
इलज़ाम पे हर साँस,
अटकती
सी रही .
प्यास
कैसी थी जो तड़पाती रही तिल-तिल मुझको ,
उम्र मैखाने कि गलियों में , भटकती-सी रही .
हम न
शायर थे कि जज़्बात जुबां पर लाते
फांस
सी दिल में हरेक बात,
खटकती-सी
रही .
उनसे बावस्ता हुए यों कि न बिछड़े न मिले ,
जुस्तजू
में ही तेरी, ज़ीस्त ये कटती-सी रही
क्या
तेरी बज़्म में , इलज़ाम लगाते तुझपर ,
आह
सीने में ही उठती सी, दुबकती -सी रही .
हम थे
आवारा कि दर-दर यूँही भटका ही किए
रास न
आया जहाँ , उम्र फिसलती -सी रही .
आस की शम्मा सरे
शाम से, जलाई हमने,
कतरा-कतरा मगर
उम्मीद, पिघलती-सी रही .
Sunday, 31 March 2013
Monday, 25 March 2013
रातरानी से झरें हम.
जुस्तज़ू में जीने की अब, क्यों हर घड़ी मरें हम
दरकिनारे डर को करके, फैसला कोई करें हम.
या खुदा तेरा जहाँ ये, क्या अजब है क्या गज़ब है.
हर कदम पे देख धोखे, आह सदमें से भरें हम.
रास आया ना जहाँ ये, है रिवायत क्या यहाँ की,
बंदिशों में कैद इनकी, फैसले क्योंकर करें हम.
इश्क ने तेरे बनाया, न थे काफ़िर कभी भी,
उस खुदा को छोड़ तेरी, यूँ इबादत अब करें हम.
रंग औ बू से दुनिया महरूम हो तेरी कभी ना.
राह महकाएँ तेरी हम, रातरानी से झरें हम.
Sunday, 17 March 2013
मनमीत (कुण्डलिया)
मनमीत से मत करियो, सखी कभी भी प्रीत|
रीता मन हो जाएगा, ऐसी है ये रीत ||
ऐसी है ये रीत , हिया हर पल तडपाए |
लाख जतन करै पर , मन कहीं चैना न पाए||
रस के हैं लोभी , उड़ जाएँ रस के रीत|
सुन सखी भ्रमर से , होते सारे मनमीत || .
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