Friday, 21 September 2012

गुनाहगार


हज़ार शिकवे तेरे , बेबुनियाद सी शिकायतें
सिर झुकाए सुनते रहे हम, गुनाहगार-से |
काश! दिल में न रख कह देते अपने भी मन की,
तो यूँ न सुलगते भीतर ही भीतर , अंगार-से |

पहल तुम्हारी थी, मुहब्बत  का जो यकीं दिलाया था, 
फिर बेरुखी से हाथ झटक, दामन भी तुमने छुडाया था|
खुदा  बन  के  तुम  फरमान  दिए  जाते  थे
बुत  बन  के  हम खड़े  थे, तेरे  हर  इलज़ाम  पे|

हलफ उठाने को भी थे राज़ी कि मान जाओ तुम  
इस बार जो बिछड़े तो किसी सूरत , जी न पाएंगे 
यकीं तुम्हें न था कि पलट के जाँचते थे तुम 
जान कितनी बची है बाकी,  तेरे जाँ- निसार में   


21 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 26/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद, यशोदा जी.... हलचल में शामिल करने के लिए.

      Delete
  2. बेहतरीन बहुत उम्दा रचना, बहुत-२ बधाई

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद अरुण जी!

      Delete
  3. खुदा बन के तुम फरमान दिए जाते थे
    बुत बन के हम खड़े थे, तेरे हर इलज़ाम पे|

    वाह....बहुत ही उम्दा....शानदार ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया इमरान जी!

      Delete
    2. धन्यवाद नादिर जी!

      Delete
  4. सुन्दर,कोमल अहसास लिए
    भावपूर्ण रचना..
    खुदा बन के तुम फरमान दिए जाते थे
    बुत बन के हम खड़े थे, तेरे हर इलज़ाम पे|
    बहुत बढ़िया..
    :-)

    ReplyDelete
    Replies
    1. हौंसला अफज़ाई के लिए शुक्रिया रीना जी!

      Delete
  5. बहुत ही खूबसूरत कविता |शालिनी जी ब्लॉग पर आने हेतु आभार |

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद जयकृष्ण जी.... आपके ब्लॉग पर आना मेरा सौभाग्य है...बहुत कुछ सीखने को मिलाता है आपसे..
      साभार

      Delete
  6. हलफ उठाने को भी थे राज़ी कि मान जाओ तुम
    इस बार जो बिछड़े तो किसी सूरत , जी न पाएंगे
    यकीं तुम्हें न था कि पलट के जाँचते थे तुम
    जान कितनी बची है बाकी, तेरे जाँ- निसार में

    बहुरत खूब ... इतने बेदर्द है वो .. पर हम हैं की प्यार किये जाते हैं ...
    लाजवाब ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद दिगंबर जी!

      Delete
  7. प्यार में मिले दर्द को बखूबी उकेरा है ... भाव प्रवण रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपके प्रेरणादायक शब्दों से सदैव ही हौंसला मिलाता है..धन्यवाद संगीता जी!

      Delete
  8. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    ReplyDelete
    Replies
    1. ब्लॉग पर आने व हौंसला अफज़ाई के लिए शुक्रिया मदन जी!

      Delete
  9. हृदय की वेदना को प्रस्तुत करती सुंदर रचना |
    मेरी नई पोस्ट:-
    ♥♥*चाहो मुझे इतना*♥♥

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद प्रदीप जी!

      Delete
  10. खुदा बन के तुम फरमान दिए जाते थे
    बुत बन के हम खड़े थे, तेरे हर इलज़ाम पे|

    बहुत उम्दा बात कही आपने ।

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी मेरे लिए अनमोल है.अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई ,तो अपनी कीमती राय कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.आपके मशवरों से मुझे बेहतर से बेहतर लिखने का हौंसला मिलता है.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
Blogger Tips And Tricks|Latest Tips For Bloggers Free Backlinks