Tuesday, 14 August 2012

गम- औ - खुशी



गम

आंसू, आहें,तड़पन, उलझन 
गम नहीं, इज़हार-ए-गम हैं.
वर्ना गम तो वो है 
जो मानिंद-ए-नासूर 
भीतर ही भीतर  रिसता है
इस ज्वालामुखी का लावा तो
पिघल, रगों  में ही बह उठता है 

खुशी

फकत होंठो पे ही नहीं खिलती 
ये तो हर गुन्चे को महकती है 
खुशी तो वो है जो खुदा का नूर बन 
जहाँ को रौशन बनाती है 
जब छिड़क देती है रंग अपने 
फलक पे इन्द्रधनुष यही सजाती है.

26 comments:

  1. Replies
    1. आभार यशवंत जी!

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  2. ख़ुशी और गम को
    सुन्दरता से व्यक्त किया है..
    बहुत बेहतरीन रचना...
    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

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    1. धन्यवाद रीना जी ..आपको भी स्वतंत्रता दिवस कि शुभकामनाएँ!

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  3. हृदयस्पर्शी उत्कृष्ट

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    1. धन्यवाद संजय जी!

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  4. कभी खुशी कभी गम जीवन में चलते रहेगें हरदम,,,,,

    वे क़त्ल होकर कर गये देश को आजाद,
    अब कर्म आपका अपने देश को बचाइए!

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,,
    RECENT POST...: शहीदों की याद में,,

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    Replies
    1. धन्यवाद धीरेन्द्र जी!

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  5. "खुशी तो वो है जो खुदा का नूर बन
    जहाँ को रौशन बनाती है
    जब छिड़क देती है रंग अपने
    फलक पे इन्द्रधनुष यही सजाती है"

    बहुत सुंदर !

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    1. हार्दिक आभार सुशीला मैम!

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  6. दोनों में बीच का अंतर स्पष्ट किया है सुन्दर है ।

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    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद इमरान जी!

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  7. गागर में सागर से भाव।

    ईद की दिली मुबारकबाद।
    ............
    हर अदा पर निसार हो जाएँ...

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    Replies
    1. धन्यवाद अर्शिया...... आपको भी ईद कि बहुत बहुत शुभकामनाएँ.... हालाँकि कुछ देर हो गई है बढ़ी देने में ... पर खुदा करे आपका हर दिन ईद हो.

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  8. बहुत सुन्दर रचना

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    Replies
    1. धन्यवाद अमरेंदर जी!

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  9. दोनों भाव कणिकाएं बहुत रागात्मक और मनोहर हैं .बढिया शब्द चयन और आनुप्रासिक छटा समध्वनिक शब्दों की पुनरावृत्ति की .सियाटिका की पहली किस्त हिंदी में आ चुकी है अपने ब्लॉग अपर ही पढ़ लें .आपने एड लगाईं तो हमने हिंदी में भी लिख दिया .बस मन किया ,इस मर्तबा अंग्रेजी में लिख दिया .

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    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद वीरू भाई, आपने मेरे अनुरोध पर अपनी पोस्ट का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया ...हर्दिक् आभार!

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  10. बहुत अच्छी पोस्ट। मरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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    Replies
    1. धन्यवाद प्रेम जी!

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  11. आंसू, आहें, तड़पन, उलझन
    गम ही नहीं, इज़हार-ए-गम हैं !

    क्या ना सहा ? जीवन में हमने
    जो ना कह सका,वह ही कम है!

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    Replies
    1. धन्यवाद सतीश जी!

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  12. ख़ुशी के सब सतरंगी रंग समेटे आपकी नजमिका आई है बेहतरीन पैरहन -ए - अंदाज़ है इस इजहारे गम का और ख़ुशी की बहर का अब यह आलेख हिंदी में अपनी समग्रता में पुन "हाज़िर है आपकी पेश कश पर कृपया आएं कृतार्थ करें ,आभार अग्रिम आपका .. कृपया यहाँ भी पधारें -
    शनिवार, 25 अगस्त 2012
    आखिरकार सियाटिका से भी राहत मिल जाती है .घबराइये नहीं
    गृधसी नाड़ी और टांगों का दर्द (Sciatica & Leg Pain)एक सम्पूर्ण आलेख अब हिंदी में भी परिवर्धित रूप लिए .....http://veerubhai1947.blogspot.com/2012/08/blog-post_25.html

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  13. शुक्रिया शालिनी जी आप लोगों से ही इस लेखन का सार है ,वरना सब बेकार है हिंदी जनप्रिय सेहत विज्ञान के लिए एक जगह बने इससे बड़ी बात हमारे देश समाज और परिवार के लिए क्या हो सकती है लोग हिंदी पढ़ें उससे अनुराग रखें इसी के लिए तो यह सारी ज़द्दोज़हद है .आप जैसे लोगों के प्रोत्साहन और संलग्नता से ही यह मिहीम आगे बढ़ेगी .

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  14. अभिव्यक्ति से परे ... जो मन की अभिव्यन्ति है उसको लिखा है आपने ... गम और खुशी के नए मायने ... लाजवाब ...

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