Monday, 26 March 2012

ख्याल...कुछ इधर उधर के

१............एक और सोच 
सोचा......
आज फिर 
कुछ अलग सोचें 
अलग से ख्याल, नए अल्फाज़,
अंदाज़ ए बयाँ भी जुदा खोजें 
कोशिश कि लाख मगर 
मुमकिन ये हो न पाया 
हर ख्याल में अपने 
हमख्याल किसी को पाया 
कभी इनसे तो कभी उनसे 
कभी किसी और से तो कभी तुमसे 
मिल ही जाते हैं 
ख्यालों के सिरे 
अब ऐसे में भला कोई कैसे 
नए सिरे से सोचे????

२. ...... एक और इंतज़ार 

इंतज़ार है मुझे 
उस पल का 
जब 
तुम्हारे होने, न होने से 
तुम्हें पाने या खोने से 
मुझे फर्क न पड़े 
पर शायद 
इस पल के लिए 
मुझे करना पड़े इंतज़ार
उस पल का 
जब मेरे खुद के होने का 
मुझे पता न चले............



33 comments:

  1. वाह मैम!....बहुत ही बढ़िया


    सादर

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    1. धन्यवाद यशवंत!

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  2. Replies
    1. धन्यवाद जितेन्द्र !

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  3. बहुत सुन्दर.....

    हर ख्याल में अपने
    हमख्याल किसी को पाया....

    दोनों रचनाएँ खूबसूरत..

    अनु

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    Replies
    1. धन्यवाद अनु जी !

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  4. इधर उधर के खयाल भी बहुत खूबसूरत हैं ...

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    1. संगीताजी, इधर उधर के ख्यालों पर ध्यान देने के लिए हार्दिक आभार!

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  5. अक्सर उलझे ख्यालों के सिरे ढूँढने और उन्हें सुलझाने में उम्र बीत जाती है.अच्छा लिखा है.

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    1. धन्यवाद निधि जी !

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  6. एक और सोच और इंतज़ार ...एक से एक उपजी ...बहुत सुन्दर और सरल ...बहुत सुन्दर

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    1. धन्यवाद भावना जी!

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  7. दोनों ही सुन्दर ......पर मुझे दूसरा वाला बहुत अच्छा लगा........शानदार।

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    1. इमरान जी , बहुत बहुत शुक्रिया!

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  8. सच है..ऐसे में कोई कैसे भला नए सिरे से सोचे... बहुत उम्दा |

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    1. धन्यवाद निशांत जी!

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  9. खूबसूरत रचना....

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    1. धन्यवाद माही जी!

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  10. सार्थक, सुन्दर सृजन, बधाई.

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    1. शुक्ला जी, धन्यवाद!

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  11. कमाल है ....
    शुभकामनायें आपको !!

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    1. सतीश जी, धन्यवाद!

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  12. पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

    ....... रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

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  13. शालिनी जी नमस्ते !
    हर ख्याल में हमखयाल जो कोई मिल जाए ...
    क्यों कोई तनहा रहे सफ़र गुफ्तगू में कट जाए ...
    *************************************************
    दोनों खुबसूरत ख्याल ... शुभकामनाएं ..

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    Replies
    1. आपको मेरा लेखन अच्छा लगा इसके लिए बहुत शुक्रिया ... आते रहिएगा ...

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  14. Brilliant poems ma'am! your poems are a source of inspiration for us to be more creative like you.....

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  15. "हर ख्याल में अपने
    हमख्याल किसी को पाया "

    बहुत सुंदर शालिनी मैम !

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  16. "हर ख्याल में अपने
    हमख्याल किसी को पाया "

    बहुत सुंदर शालिनी मैम !

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  17. bahut umda rachna ,bdhai aap ko

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  18. achhi anubhooti.........

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  19. इंतज़ार है मुझे
    उस पल का
    जब
    तुम्हारे होने, न होने से
    तुम्हें पाने या खोने से
    मुझे फर्क न पड़े

    mushkil hai aisa hona ....fark to padata hi hai...achachhi rachana ke liya badhai

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