Sunday, 25 August 2013

कहाँ हर किसी की तरफ उसकी नज़र जाए है


कहाँ हर किसी की तरफ उसकी नज़र जाए है
एक नज़र देख ले किस्मत उसकी संवर जाए है
    
कुछ ऐसा नूर है उसमें, ऐसी अदा पायी है
जो भी देखे है नज़र, उसपे ठहर जाए है

पिघलते कांच-सा वो बह रहा रगों में मेरी
कभी दिल में तो कभी खूँ में उतर जाए है
     
जिन्दा कहाँ है हम जो तुझे जल्दी है पड़ी     
दो घड़ी रुक ऐ मौत, कि वो ठहर जाए है

अजीब शै है मुहब्बत नींद गई चैन गया
साँस जाने में बस अब, कोई कसर जाए है

है खौफज़दा खुद दहशत भी दहशतगर्दों से
सामने देख इन्हें मुड़ खुद ही कहर जाए है
    
तल्खियों ने किया दुश्वार मयकशी को मेरी
बूंद उतरे गले में तो लगे जैसे जहर जाए है

ऐशाइशें जुड़ीं हों भले दुनिया की घरों में
एक माँ न हो तो परिवार बिखर जाए है

नूर ऐ इलाही है रोशन ज़र्रे-ज़र्रे में जहाँ के
वो ही वो है बस जहाँ तक नज़र जाए है

महफ़िल ऐ शम्मा में ज़िक्र हो परवानों का
सबसे पहले मेरा ही, किया जिकर जाए है

अजब सी ताज़गी है कि तुझे सोच भी लूँ
चहरे से शिकन, जेहन से फिकर जाए है

मरने से पहले एक मुलाकात का वादा था
इन्तेज़ार उनको कब मेरे मरने की खबर आए है

आज शब उसने मिलने का पैगाम दिया है
आँखों ही आँखों में बीता हरेक पहर जाए है 

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - सोमवार- 26/08/2013 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः6 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

    ReplyDelete
  2. वाह वाह !!! बहुत सुंदर गजल ,,,शालिनी जी,,,बधाई
    RECENT POST : पाँच( दोहे )

    ReplyDelete
  3. बहुत ही उमदा...

    ReplyDelete
  4. गजब की ख्वाहिश अजब दास्ताँ लेकर

    ReplyDelete
  5. सूफी पुट लिए अति सुन्दर कृति.

    ReplyDelete

  6. बेहतरीन प्रस्तुति

    ReplyDelete
  7. आठवां शेर लाजवाब.....1,3,5,9,10,11,13 शेर बढ़िया लगे ..........एक मुक़म्मल ग़ज़ल दाद कबूल करे।

    एक बात बस इतनी कहना चाहूँगा कुछ शेर बेवजह बाधा बन गए रवानगी में...... बहुत लम्बी ग़ज़ल कहने से थोडा परहेज़ करें |

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। ।

    ReplyDelete
  9. उम्दा गज़ल ... हर शेर लाजवाब है ...

    ReplyDelete
  10. हर एक शेर है, किसी हिरकनी की तरह
    पढते पढते चमक, आँखों को चुंधा जाए है ।

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी मेरे लिए अनमोल है.अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई ,तो अपनी कीमती राय कमेन्ट बॉक्स में जरुर दें.आपके मशवरों से मुझे बेहतर से बेहतर लिखने का हौंसला मिलता है.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
Blogger Tips And Tricks|Latest Tips For Bloggers Free Backlinks