Friday, 10 June 2011

आफताब हूँ


आफताब हूँ ,ताउम्र झुलसता - जलता रहा हूँ
पर सौगात चांदनी की तुझे दिए जा रहा हूँ मैं .
रातों के सर्द साए तेरे आंचल पे बिछा,
खुद फलक से दरिया में छिपा जा रहा हूँ मैं .
जलें न मेरी रौशनी  कहीं चश्म ए तर तेरे ,
सितारों की बारात सजाये  जा रहा हूँ मैं.


3 comments:

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