Friday, 29 March 2019

राब्ता

राब्ता हुआ
दो रूहों के दरम्यां
और दो रूहें मिलकर
एक सिम्त हो गईं
फिर ज़िस्म ने सेंध लगाई
रूहों के दरम्यां
दो ज़िस्म मिले पर
रूहें जुदा हो गईं...
अब शिकायतें करती हैं रूहें
एक दूसरे से
कि हममें-तुममें नहीं रहा
वो पहले-सा
राब्ता
शालिनी रस्तौगी 

6 comments:

  1. वाह !बहुत सुन्दर

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 30/03/2019 की बुलेटिन, " सांसद का चुनाव और जेड प्लस सुरक्षा - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. बहुत बढ़िया

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