तुम्हारे शब्द
पानी की लहरों पर
बहते हुए
कहीं दूर चले जा रहे थे
गूंज रही थी कानों में
धीरे-धीरे
दूर होती जा रही थीं
उनकी आवाजें
पर आगे तो
भंवर है एक बहुत बड़ा
अनंत, अंधकारमय
सुना है कि वहाँ से
शब्द कभी
वापस नहीं आते
उस भंवर तक पहुंच पाएँ
उससे पहले
छान निकालूँ इन्हें
दिल की छलनी में
और धुप में सुखा
सहेजूँ इन्हें
यादों की किताब में
गुलाब की तरह
ताकि जब भी पन्ने पलटें
महक उठे तन-मन
और एक बार फिर से जी लूँ मैं
तुम्हारे शब्द