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Thursday, 19 February 2026

दोबारा

 

दोबारा

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अगर हम कभी दोबारा मिलेंगे

क्या बातों के पैबंद

जख्मों को सिलेंगे?

रिश्तों की गाँठें कड़ी होंगी या फिर

टूटे सिरे खुल के बिखरेंगे ?

शिकवों की उलझन और

पेचीदा होगी या

रिश्तों के धागे थोड़े सुलझेंगे?

अजनबीपन से बोझिल नज़र न उठेगी

या अपनेपन के दरिया बहेंगे ?

एक चुप्पी पसरी रहेगी दरम्यां या

बातों के दौर लम्बे खिचेंगे?

बिछड़ने को होगा ये मिलना हमारा

या हमेशा को मिलने को हम मिलेंगे?

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