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Thursday, 19 February 2026

कविता का जन्म

 

क्या ठहरे जल के भीतर 

लहरें उत्ताल तड़पती हैं ?

क्या शांत मन से कभी

कविता कोई जन्मती है?

न हो जब तक,

मन विह्वल, ह्रदय व्याकुल

भावों का अतिरेक न जब तक

प्राणों को कर डाले बोझिल |

हृदय के उदगार न जब तक

शब्दों में ढल जाने को मचलें|

आँखों की पीड़ा, आँसू में घुल

जब तक कागज़ पर न उतरे|

प्रसव वेदना बिना क्या जननी

बालक को जन पाती है?

जब ह्रदय कसकता दारुण दुःख से

तब कविता रच पाती है|

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