होश है या कोई ख़ुमारी है?
है
सुकूँ या कि बेक़रारी है?
तेरा
होना अजाब था दिल पे,
तू
नहीं तब भी दिल ये भारी है|
रतजगे
बन गए नसीब उनका,
वस्ल
में शब जो इक गुजारी है|
ज़ख्म
अपना हरेक गिनते हो,
जो दिए
उनकी कब शुमारी है?
तंज, ताने शिकायतें शिकवे,
इश्क
है याकि जाँख़ुआरी है|
आँख से
बूँद पैमाने में गिरी,
सारी
मय अब तो खारी-खारी है|
हर दगा
दोस्तों से पाई है,
देख लो
कितनी पक्की यारी है|
तल्ख़
लहज़ा हमें भी आता है,
बस
जुबां पे लिहाज़ तारी है|
अपना
सामान ध्यान से रखना,
सूचना
जन के हित में जारी है |

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